विक्रम बेताल की कहानी -7(Hindi Motivation Story) -: बहुत समय पहले की बात है। जब समुद्र किनारे बसे एक नगर ताम्रलिपि पर राजा चन्द्रसेन का राज हुआ करता था। राजा से मिलने के लिए हजारो लोग उत्सुक रहते थे। उन्ही में से एक था , नवुवक सत्वशील। सत्वशील को काम की तलाश थी। इसलिए वह उनसे मिलने के लिए रोज राजा के महल पहुंच जाता। “अफ़सोस उसे हर बार दरबारी भगा देते थे। विक्रम बेताल की कहानी -7(Hindi Motivation Story)

ऐसा होते -होते बहुत समय गुजर गया। लेकिन उनसे हिम्मत नहीं हारी। वह राजमहल के साथ ही हर उस जगह पहुंच जाता था। जहा राजा की सवारी जाती थी। एक दिन राजा घूमने निकले थे। और लौटते समय तेज धुप के वजह से राजा को बहुत तेज प्यास लगी। तभी सभी सैनिक इधर -उधर हो जाते है पानी ढूढ़ने की चकर में। लेकिन कोई पानी नहीं ढूंढ पता है।

तभी अपने मार्ग पर राजा नवयुवक सत्वशील को देखते। और उससे पूछते है। की क्या आपके पास पानी है। “सत्वशील तुरंत राजा को पानी पिलाता है, और साथ ही मीठे फल भी खिलता है। राजा उससे काफी प्रसन होते है। और कहते है में तुम्हे कुछ भेट देना चाहता हु।

बताओ तुम्हे क्या चाहिए ? राजा के सवाल पूछते ही , सत्वशील झट से जबाब देता है। महाराज” में बहुत समय से काम की तलाश में घूम रहा हु। यदि आप काम दे, दे तो आपकी बहुत बड़ी मेहरबानी होगी।

इतना सुनते ही राजा उसे अपने दरबार में नौकरी दे देते है। और कहते है। उसके द्वारा पिलाये गए पानी का उपकार जीवन भर याद रखेंगे। “वक्त बीतता गया “और अपनी प्रतिभा की वजह से नवयुवक राजा का बहुत करीबी बन गया।

एक दिन “भू -पति चन्द्रसेन ” सत्वशील से कहते है। हमारे नगर ताम्रलिपि में बेरोजगारी बहुत बाढ़ गई है। हमें कुछ करना चाहिए । इतना सुनते ही नवयुवक कहता है।

हुकुम ‘ कीजिये महाराज ,राजा कहते है। हमारे पास एक टापू है। जो काफी हरा बहरा है। अगर वह कुछ खोज की जाये तो। काम के कुछ अवसर मिल सकते है। इतना सुनते ही नवयुवक , जी महाराज कहकर टापू के लिए रवाना हो गया।

समुद्र के रास्ते पहुंचते ही सत्वशील को पानी में तैरता हुआ एक ध्वज दिखता है। “ध्वज को देखते ही वह हिम्मत करके पानी में कूद जाता है। पानी में कूदते ही नवयुवक सत्वशील , टापू की राजकुमारी के पास पहुंच जाता है। जहा वह अपनी सहेलियों और सेविका के साथ गाना गा रही होती है।

“राजकुमारी को नवयुवक अपना परिचय देता है। कुछ समय बात- चित करने के बात राजकुमारी सत्वशील को खाने का निमंत्रण देती है।
और खाना खाने से पहले पास के तालाब में स्नान करने को कहती है। जैसी ही सत्वशील नहाने के लिए तालाब में उतरता है। वह ताम्रलिपि महल की सभा में पहुंच जाता है। विक्रम बेताल की कहानी -7(Hindi Motivation Story)

एकदम सभा में उपस्थित देख राजा चन्द्रसेन ” चकित रह जाते है। वह उससे पूछते है ? अरे , तुम यहाँ कैसे सत्वशील राजा को पूरी घटना के बारे में बताता है।

सारी बाते सुनने के बाद राजा भी उस टापू में जाते है। वहां पहुंचते ही राजा भू चन्द्रसेन उस टापू पर विजय हासिल कर लेते है। ऐसा होते ही राजा चद्रसेन को राजकुमारी उस टापू का राजा घोषित कर देती है। राजा टापू जितने की खुशी में वहां की राजकुमारी और सत्वशील की शादी करवा देते है।

इस तरह राजा “चन्द्रसेन” सत्वशील के पानी के उपकार को चूकते है।

समाप्त

इतनी कहानी बताकर बेताल चुप हो जाता है। और विक्रम से पूछता है। की बताओ “राजा चन्द्रसेन और सत्वशील इन दोनों में से सबसे ज्यादा बलवान कौन था। सवाल सुनते ही राजा विक्रम बोलते है। सत्वशील ज्यादा बलवान था। बेताल पूछता है ,कैसे ? तब विक्रम बोलते है। की बिना डरे ध्वज देख कर पानी में कूद जाता है। यह बिना सोचे की पानी में खतरा भी हो सकता है। जबकि राजा को पता था। पानी में कुछ खतरा नहीं है।
सवाल का जबाब मिलते ही बेताल राजा विक्रम के कंधे से उतर फिर से घने जांगले में चले जाता है। राजा विक्रम आदित्य “बेताल को अपने कंधे पर लादने की कई कोशिश कर चुके थे। और बेताल लगातार कहानिया सुनाकर राजा विक्रम के हाथो से निकल जाते। इस बार बेताल ने फिर से कहानी सुनाई।

सीख – हमें हिम्मत कभी नहीं हारनी चाहिए। और कर्म करते रहना चाहिए।


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