विक्रम बेताल की कहानी-9 (Hindi Motivation story) -: एक बार की बात है। उज्जैन नगर में एक राजा राज्य करता था। राजा का नाम वीर देव , रानी का नाम पद्मा था। उन दोनों की एक बेटी थी रूपमती। एक दिन रूपमती अपनी सहेलिओ के साथ ,और मंत्रियो के साथ घूमने निकली। घूमने के साथ -साथ वह अपनी प्रजा को भेट भी दे रही थी।
‘इतने में एक व्यक्ति ने राजकुमारी को बहुत ही खूबसूरत वस्त्र भेट में दिए। राजकुमारी उन वस्त्र को देखकर बहुत खुश हुई। राजकुमारी ने उस ,व्यक्ति से पूछा की अपने यह वस्त्र कहा से ख़रीदा है। “यह वस्त्र बहुत सुन्दर है। “
इतने में राजकुमारी के मंत्री ने कहा ” की ये वस्त्र इन्होने खुद बनाये है। “ये बहुत महान कलाकार है। मंत्री की बात सुन कर राजकुमारी चकित रह गई।
राजकुमारी ने उसके , द्वारा बनाये गए और वस्त्रो को देखने की इच्छा दिखाई। व्यक्ति बहुत खुश हुआ। और राजकुमारी को घर चलने के लिए आमंत्रित किया।
राजकुमारी ने आमंत्रण स्वीकार किया। और ,उसके घर जाकर कई वस्त्र देखे और खुश होकर कहा, मन कर कर रहा यही रुक जाऊ और आपसे ये कारीगरी सीखु।
इतना कहकर राजकुमारी अपनी यात्रा पूरी करने फिर निकल पड़ी। राजकुमारी कुछ आगे बढ़ी ही थी की ,आगे से एक व्यक्ति आकर राजकुमारी और उनकी सहेलियों से कहता है।
“आगे वृक्ष के निचे शेर है।”राजकुमारी ने चौंक कर उस व्यक्ति से कहा आपको कैसे पता चला “अपने देखा है क्या ?
उस व्यक्ति ने कहा नहीं राजकुमारी। मुझे मेरे पक्षी दोस्त ने जानकारी दी है। राजकुमारी फिर से “चौंक गई ” उन्होंने पूछा की क्या आप पक्षियों से बात करते हो ? फिर उस व्यक्ति ने कहा की मुझे पक्षियों , जानवरो , और पानी में रहने वाले जीवो की भाषा आती है। विक्रम बेताल की कहानी -9 (Hindi Motivation story)
राजकुमारी बहुत खुश हुई। और उन्हें पक्षियों की भाषा सिखने का उत्साह दिखाया ,और उस व्यक्ति को महल आने का आमंत्रण दिया। उस व्यक्ति ने कहा ये ,पक्षी और जानवर ही उनका परिवार है। तो वह महल कैसे आ सकते है। राजकुमारी ने उनकी बात का मान रखा और कहा।
“भविष्य में कभी मौका मिला तो वह खुद उनके पास आएगी यह भाषा सिखने।
इतना कहकर वह आगे चली गई। यात्रा लम्बी थी। यात्रा करते -करते राजकुमारी की तबियत ख़राब हो गई।
राजकुमारी को वेद के पास ले जाया गया। ” उस वेद ने राजकुमारी को वह रुक के आराम करने के लिए कहा। और दवाई दी , दवाई खाने के कुछ घंटे के बाद राजकुमारी ठीक हो गई।
राजकुमारी ने उस वेद का धन्यवाद किया।
‘वह बैठे अन्य लोगो ने राजकुमारी को उस वेद के बारे में बतया की’। वेद किस तरह सभी लोगो की मदत करते है। ये सब सुनकर राजकुमारी ने कहा आप बहुत अच्छा और पुण्य काम कर रहे है।
“मेरा भी मन है ” की में भी ऐसे ही सभी की सेवा करू। फिर राजकुमारी अपनी यात्रा पूरी करने निकल पड़ी। विक्रम बेताल की कहानी -9 (Hindi Motivation story)
वह कुछ दूर ही गई थी। की आगे जा कर राजकुमारी का पैर जानवरो के लिए बिछाये जाल ,में फास गया। राजकुमारी मद्दत के लिए चिलाने लगी।,
उनकी सहेलिया और मंत्री भी मद्दत के लिए पुकारने लगते है। इतने में एक वीर ने अपनी सूझ -बुज से राजकुमारी को उस जाल से बहार निकल दिया। राजकुमारी खुश हुई ,और उस वीर का धन्यवाद किया। साथ ही उससे दुबारा मिलने की इच्छा जताकर वह से चली गई।
“इसके बाद रानी लम्बी यात्रा के बाद महल लौट आई। तब राजा ने बताया की आस -पास के राजकुमारों के रिश्ते आ रहे है। पिता की बात सुन राजकुमारी ने कहा। उन्हें कोई राजकुमार या राजा नहीं बल्कि ,की साधारण व्यक्ति चाहिये ।
उन्होंने अपने पिता से कहा। की मैने इस यात्रा में सीखा की साधारण व्यक्ति भी ज्ञानी , मेहनती और महान होते है। इसलिए मुहे “कोई साधारण व्यक्ति ही जीवन साथी के रूप चाहिए। राजकुमारी की बात सुन राजा ने “सवयंबर ” की घोषणा की। सवयंबर की बात सुन वो चारो भी आये जो यात्रा के दौरान राजकुमारी से मिले थे।
समाप्त
कहानी यहाँ तक ही पहुंची थी की , बेताल ने कहानी को बीच में रोके विक्रम से सवाल पूछा , बेताल ने पूछा ? राजकुमारी के सामने चार वर थे। एक भाषा ज्ञानी , एक वस्त्र बनाने वाला , एक वेद और एक वीर अब बताओ इसमें से राजकुमारी के लिए सर्वश्रेठ वर कौन था।
किसके गले में राजकुमारी ने सवयंबर की वर माला डाली। “जल्दी बताओ नहीं तो में तुम्हारा गाला काट दूंगा। राजा विक्रम ने जबाब देते हुए कहा , कलाकार बहुत धनी था ,लेकिन राजकुमारी को धन की क्या जरूर इसलिए राकुमारी कलाकार का चुनाव, नहीं करेगी।
वही दूसरा व्यकित भाषा ज्ञानी है। वह मनोरंजन के ठीक है।
वही तीसरा व्यक्ति वेद जो एक अच्छा व्यक्ति है समाज की सेवा करता है , लेकिन उसकी तुलना वीर से की जाये तो राजकुमारी उस वीर का ही चुनाव करेगी।
राजा का कोई बेटा नहीं है। इसलिए राजकुमारी के लिए सर्वश्रेठ वर वीर ही होगा।
विक्रम की बात सुन बेताल बहुत खुश हुआ। लेकिन हर बार की तरह विक्रम के बोलते ही बेताल फिर से घने जंगलो में चले गया।
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