पिनोकियो की कहानी (Hindi Motivation story) – : सालो पहले एक शहर में लकड़ी का काम करने वाला कॉरपेंटर रहता था। जिसका नाम एंटोनियो था। वह लकड़ी से एक से -एक बढ़कर चीज बनता था।

एक दिन वो यूँ ही घूमते हुए जंगल पहुंच गया। वहा उसे एक लकड़ी का टुकड़ा मिला ,और वह उसे घर ले आया। घर पहुंच कर उसके मन में उस लकड़ी का टेबल बनाने का ख्याल आया। उसने तुरंत टेबल बनाने का सामान का इंतज़ाम किया। और टेबल बनाने लग गया।

जैसे ही उसने टेबल का पैर बनाया ,तो उसमे से चिल्लाने की आवाज आई। डर के मारे एंटोनियो ने उस टेबल का पैर और पूरी लकड़ी जेपटो नाम के एक गरीब इंसान को दे दी।

गरीब जेपटो ने उस लकड़ी से बोलने वाली कटपुतली बनाने की सोची , ताकि वह वह खूब पैसे कमा सके। कटपुतली बनाने के बाद जेपटो ने उसका नाम पिनोकियो रखा। पिनोकियो बड़ा शरारती था। और जेपटो को हमेशा से ही शांत और तमीज से पेश आने वाले बच्चे पसंद है।

जेपटो ने जब पिनोकियो के दोनों पैर बना दिए , तो उसने चलना सिखाया। चलना सीखते ही पिनोकियो ने दरवाजा तोड़ के बाहर भाग गया।

रास्ते में पिनोकियो को ऐसे हरकत देख कर की वह इतनी उछाल कूद देख कर रहा है पुलिस वाले को लगा की , जेपटो ने पिनोकियो को अच्छी शिक्षा नहीं दी है। और घर में कैद कर के रखा था। इसलिए पुलिस वाले ने जेपटो को गिरफ्तार कर लिया।

अब भूख लगने के पर पिनोकियो घर लौटा ,तो वहा जेपटो नहीं था। इसलिए पड़ोसियों के घर की घंटी पिनोकियो बजता रहा। बार – बार घंटी बजाने पर पडोसी पोनोकियो पर गुस्से के मारे उसके मुँह पर ठंडा पानी डाल देते है।

भूखा पिनोकियो अब उनसे खाना भी नहीं मांग पाया। और भीगा हुआ वह घर लौट गया। भीगने की वजह से पिनोकियो स्टोव के ऊपर बैठ गया। और सुबह होते ही वह सूख गया , लेकिन उसका एक पैर पूरी तरह से जाल चूका था।

सुबह तक जेपटो भी घर लौट आया। उसने जैसे ही पिनोकियो की ऐसी हालत में देखा , तो लकड़ी से उसका एक पैर तैयार किया। खुश होकर जेपटो ने अच्छा बच्चा बनकर और स्कूल जाने की बात की कही।

यह बात सुन कर जेपटो सोच में पड़ गया। की में कैसे इसे स्कूल में भेजूंगा।

उसके पास तो उतने पैसे भी नहीं थे। तभी वह बाजार गया और तुरंत अपना कोट बेच कर कुछ पैसे ले आया। जेपटो ने सारे पैसे पिनोकियो को दे दिए ,और कहा की कल ये पैसे लो और कल से स्कूल चले जाना।

उसी बेचे उसे कोट से जो पैसे मिले उससे जेपटो ने पिनोकियो के लिए किताबे ले आया। किताबे देख कर पिनोकियो ने कहा “, पापा अपने मुझे स्कूल भेजने के लिए अपना कोट बेच दिया। ” इस पर जेपटो ने कहा , बेटा तुम मेरी फ़िक्र मत करो और स्कूल जाने की तैयारी करो। पिनोकियो अपने पापा की बात से सहमत हुआ और कहा ठीक है ,पापा में स्कूल जाऊंगा और आपका नाम रोशन करूँगा।

पिनोकियो अगले दिन सुबह उठ कर तैयार हो गया और स्कूल के लिए निकल गया। रास्ते में उसने एक जगह लोगो की काफी भीड़ देखी। वह दौड़ा – दौड़ा वह पंहुचा और, भीड़ में खड़े आदमी से पूछा यहाँ क्या हो रहा है ?

उस आदमी ने कहा यह एक पपेट शो चल रहा है। ” इस पर पिनोकियो ने कहा , अरे पपेट शो। मुझे भी पपेट शो देखना है , लेकिन मेरे पास तो पैसे नहीं है क्या करू ?

तभी पिनोकियो को एक तरकीब सूझी और उसने अपने सारे किताबी रद्दी वाले को बेच कर पैसे ले लिए। फिर उस पैसे से उसने पपेट शो की टिकट खरीद ली। और शो देखने चला गया। शो में पहुंच कर उसने बहुत सारे पपेट शो देखे , उसी पपेट शो देखने के बाद पिनोकियो सर्कस के स्टेज पर चढ़कर डांस करने लगा।

उसी समाया वहा पपेट मास्टर आ गया। और जैसे ही शो ख़त्म हुआ पपेट मास्टर ने सारे पपेट सहित पिनोकियो को भी उठा कर घर ले गया। और घर पहुंच कर जब पपेट मास्टर को खाना बनाने की लिए लकड़ियों की आवश्यकता पड़ी तो , मास्टर ने सोचा को क्यों न इस पिनोकियो का प्रयोग किया जाये। पिनोकियो की कहानी (Hindi Motivation story)

उसने पिनोकियो से कहा की मुझे खाना बनाने के लिए कुछ लकड़ियों की जरूरत है ,ये सुन पिनोकियो डर गया ,उसने कहा मुझे मत जलाओ वह अपने पापा को याद करने लगा ,पापा मुझे बचाओ।

पिनोकियो के मुँह से पापा शब्द सुनकर पपेट मास्टर हैरान रह गया। उसने पिनोकियो से पूछा ? की क्या तुम्हारे पापा भी है। पिनोकियो ने कहा” हां , और वो बहुत अच्छे है। पिनोकियो ने अपनी पूरी कहानी पपेट मास्टर को बताई।

कहानी सुन पपेट मास्टर ने कहा “,तुम बहुत अच्छे बच्चे हो ये लो कुछ सोने के सिक्के और अपने के लिए नई कोट खरीद लेना |

पपेट मास्टर से सोने के सिक्के लेने के बाद पिनोकियो अपने घर की और निकल पड़ा। रास्ते में उसे एक बिल्ली और लोमड़ी मिली ,पिनोकियो ने उसे सिक्को के बारे में सब बता दिया।

यह सुनकर बिल्ली और लोमड़ी ने सिक्के लूटने का सोचा। तभी लोमड़ी ने बिल्ली से कहा ,”सुनो बिल्ली मैडम आप इस पिनोकियो को अपना दोस्त बना लो। बिल्ली ने कहा “,ठीक है बनती हूँ। फिर बिल्ली और लोमड़ी ने पिनोकियो से दोस्त बनने की खुशी में जश्न करने को कहा, और पार्टी करने के लिए एक होटल में चले गए ।

वह तीनो ने खाना खाया और ,लोमड़ी और बिल्ली बिना पैसे दिए वह से निकल गए। जिसका बिल पिनोकियो की भरना पड़ा। होटल का बिल भर कर जैसे ही बाहर निकलता है। उसे एक पीछे से आवाज आई, रुक जाओ वही। और सरे पैसे दे दो वरना मारे जाओगे। पिनोकियो समझ गया यह हरकत बिल्ली और लोमड़ी की हरकत है।

पिनोकियो ने जल्दी से अपने पैसे छुपा लिया। पैसे ना ,देने पर बिल्ली और लोमड़ी ने पिनोकियो को पेड़ पर लटका दिए। और कहा अगर सही सलामत बचाना चाहते हो तो ,सारे पैसे हमें दे दो। उसने एक बार फिर से अपने पापा को याद किया ,तभी एक परी ने पिनोकियो की आवाज सुनी ,उस परी ने एक गिद्द और कुत्ते को लोमड़ी को बचाने के भेजा।

गिद्ध ने पिनोकियो की रस्सी काटी और कुत्ते ने उसे तुरंत परी के पास भेज दिया। अगले दिन सुबह जब पिनोकियो के नींद खुली ,तो परी ने उससे पूछा की तुम यहाँ कैसे पहुंचे।

तभी पिनोकियो ने परी को सारी कहानी बताई ,इस दौरान उसने ये झूठ बोला की उसके सोने के सिक्के चोरी हो गए है। जबकि वो सिक्के उसी के पास थे। पिनोकियो के झूठ बोलते ही उसकी नाक लम्बी होती चली गई , परी समझ गई पिनोकियो झूठ बोल रहा है। परी ने बोलो पिनोकियो झूठ मत बोलो , में देख रही हूँ तुम्हारी नाक लम्बी हो रही है।

तभी पोनोकियो डर गया। परी से माफ़ी मांगने लगा। और कहा की वो अब दुबारा ऐसा नहीं करेगा। इसके बाद परी ने पिनोकियो को और सिक्के दिए और कहा की ये सिक्के तुम अपने पापा को दे देना।

वहां से सिक्के लेकर पिनोकियो एक बार फिर अपने घर की ओर चला। तभी उसे रास्ते में फिर से वही बिल्ली और लोमड़ी मिले। उन्होंने एक बार फिर से पिनोकियो को सिक्कों के पेड़ उगाने के लिए मना लिया और उसके सिक्के चोरी कर के वहां से भाग गए। इसके बाद पिनोकियो मायूस होकर खाली हाथ अपने घर पहुंचा।

यहां उसने अपने पापा से कहा, ‘मुझे माफ कर दीजिए। मैं दूसरों के बहकावे में आ गया था।’ जेपैटो ने पिनोकियो को माफ कर दिया और उसे अगले दिन स्कूल भेजा। स्कूल जाते समय रास्ते में पिनोकियो को स्कूल का सबसे शरारती बच्चा कार्लोस मिला। उसने कहा, ‘हे पिनोकियो! तुम कहां जा रहे हो। स्कूल जाकर तुम समय बर्बाद मत करो। हमारे साथ टॉय लैंड चलो। वहां बहुत मजा आने वाला है।’

पिनोकियो इस बार कार्लोस की बातों में आ गया और उसके साथ चल पड़ा। रास्ते में उन्हें गधा गाड़ी मिली और वो उस पर सवार हो गए। कुछ दूर जाने के बाद दोनों अचानक से गधे के रूप में आ गए। दोनों गधे के रूप में ही बाजार पहुंचे। वहां एक किसान ने कार्लोस को खरीद लिया, जबकि एक सर्कस के मालिक ने पिनोकियो को खरीदा।

अब पिनोकियो को रोजाना सर्कस में अपना करतब दिखाना होता था। एक दिन करतब दिखाते-दिखाते पिनोकियो स्टेज से गिर गया और उसका पैर टूट गया। इस कारण उसे सर्कस से भी निकाल दिया। तभी एक दिन एक बूढ़ा आदमी उसे खरीदने लिया। वह पिनोकियो की खाल से ढोल बनाना चाहता था। उस बूढ़े आदमी ने पिनोकियो को एक बड़े से पत्थर से बांधा और समुद्र में फेंक दिया।

समुद्र में जाने के बाद पिनोकियो जोर-जोर से रोते हुए उस परी को याद करने लगा। पिनोकियो ने कहा, ‘परी मुझे बचा लो। आज के बाद मैं कभी भी ऐसी बेवकूफी नहीं करूंगा, सच्ची।’ पिनोकियो की आवाज परी के कानों तक पहुंची। उसने तुरंत एक मछली को आदेश दिया कि समुद्र में जाकर पिनोकियो को बचा लो।

मछली तुरंत पिनोकियो के पास पहुंची और रस्सी काटकर उसकी गधे वाली खाल खा ली। इसके बाद पिनोकियो वापस से अपने कठपुतली रूप में आ गया।

इसके बाद पिनोकियो जैसे-तैसे तैरते हुए समुद्र से निकलने की कोशिश करने लगा। तभी एक बड़ी-सी शार्क उसके पीछे आ गई और लहरों की तेज चपेट के कारण पिनोकियो शार्क के मुंह में जा पहुंचा। शार्क के मुंह में काफी अंधेरा था। यह देख पिनोकियो घबरा गया। उसने आवाज लगाई, ‘कोई है? मेरी मदद करो।’

तभी पिनोकियो को एक रोशनी दिखाई दी। उसने देखा कि टॉर्च लेकर उसके पापा जेपैटो खड़े थे। पिनोकियो काफी खुश हुआ। जेपैटो भी पिनोकियो को देखकर बहुत खुश हुआ। उसने कहा, ‘ओह मेरे बच्चे! मुझे लगा नहीं था |

कि मैं तुम्हें दोबारा जिंदा देख पाऊंगा। तुम मुझे जमीन पर नहीं दिखे इसलिए मैं तुम्हें पानी में खोजने आ गया, लेकिन एक भयानक तूफान की वजह से मुझे एक शार्क ने खा लिया। इस पर पिनोकियो ने कहा, ‘ओ पापा! हम दोनों जिंदा हैं। चलो यहां से बाहर निकले की कोशिश करते हैं।’

पिनोकियो और उसके पापा, शार्क के मुंह से बाहर निकालने की कोशिश करने लगे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। तभी शार्क को नींद आने लगी और वह मुंह खोलकर सोने लगी। इस मौके का फायदा उठाकर पिनोकियो और जेपैटो पानी में कूद गए और तैर कर बाहर निकल गए। पिनोकियो की कहानी (Hindi Motivation story)

बाहर निकलने के बाद पिनोकियो ने देखा कि उसके पापा को तेज बुखार है। उसने अपने पापा को एक जगह बैठाया और उनके लिए कुछ खाने की तलाश में निकल पड़ा। तभी उसे एक दुकान दिखी। उसने दुकानदार से अपने पापा के लिए दूध मांगा। दुकानदार ने कहा, ‘पैसे दो और दूध ले जाओ।’

पिनोकियो के पास पैसे नहीं थे। इस पर दुकानदार ने कहा, ‘अगर तुम्हारे पास पैसे नहीं है तो तुम यहां सुबह से शाम काम करो और पापा के लिए दूध ले जाओ।’

पिनोकियो दुकानदार की शर्त मान गया और वहां काम करने लगा। कुछ दिन बाद पिनोकियो के पापा ठीक हो गए। फिर दोनों वहां से अपने घर की ओर निकल पड़े। अब पिनोकियो काफी बदल गया था और पापा के काम में हाथ बटाने लगा।

एक दिन उसे पता चला की परी की तबीयत खराब है। उसने तुरंत कुछ पैसे परी को भेजे। यह देखकर परी काफी खुश हो गई और एक रात वह पिनोकियो के सपने में आई और उसे वरदान दिया। अगली सुबह जब पिनोकियो ने खुद को शीशे में देखा तो आश्चर्यचकित रह गया। पिनोकियो की कहानी (Hindi Motivation story)

उसने देखा कि उसका चेहरा पूरी तरह से बदल गया और वो अब कठपुतली से एक सुंदर लड़का बन गया। वह दौड़ा-दौड़ा अपने पापा के पास पहुंचा। जेपैटो भी पिनोकियो को देखकर काफी खुश हुआ। पिनोकियो और जेपैटो दोनों खुशी-खुशी रहने लगे।

सीख – इस कहानी से यह सीख मिलती है कि हमें हमेशा बड़ों का कहना मानना चाहिए। बड़ो की बात न सुनने से कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।


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