नीली आँखों वाली परी (Hindi Motivation story) – : सालो पहले भनिया नाम के राज्य में कर्ण नाम के राजा का शासन था। राजा का दिल बहुत साफ़ था। वह हर त्यौहार के दिन में सभी दान दिया करता था।
इस साल भी त्यौहार के अवसर पर राजमहल में दान लेने वालो की भीड़ लग गई। राजा ने सबको भर -भर के दान दिया। अंत में कमर जुकाते हुए एक महिला दान लेने के लिए आई , लेकिन दान करने के लिए राजा के पास अब कुछ भी नहीं बचा था। राजा ने फिर अपने गले से हीरो का हार निकल के उस महिला को दे दिया।
वह महिला राजा के सर पर हाथ फेर कर राजा को आशीर्वाद देकर वहा से चली गई।
अगले दिन राजा बगीचे में बैठ कर सोच रहे थे। की मेरे जीवन में एक पुत्र की कमी है । भगवान ने मुझे सबकुछ दिया पर पता नहीं क्यों पुत्र का सुख नहीं दिया ? तभी राजा की गोद में एक आम आकर गिरा। राजा इधर -उधर देखने लगा ,की आखिर ये आम आये कहा से मेरे गोद में ?
तभी कुछ देर बाद उन्हें बहुत साडी परिया दिखी। उन सभी परियो में से एक नीली आँखों वाली पारी राजा के पास आई,और कहने लगी की ये आम तुम अपनी पत्नी को दे देना। यह आम तुम्हे पुत्र रत्न देगा। इसको खाने के नौ महीने बाद तुम्ही पत्नी माँ बन जाएगी।
वैसे तुम्हारे भाग्य में पुत्र सुख तो नहीं है ,लेकिन तुम बहुत बड़े दानी और अच्छे इंसान हो इसलिए तुम्हे यह सुख मिल रहा है। बस यह सुख तुम्हे 21 सालो तक ही मिलेगा। जैसे ही उसकी शादी होगी उसकी मौत हो जाएगी।
राजा ने नीली आँखों वाली पारी से पूछा ? क्या इसका कोई उपाय नहीं है “
परी ने कहा राजा कल ” जो कमर झुका के महिला तुम्हारे पास दरबार में दान लेने आई थी। देखो ये माला मेरे गले में है , ये माला तुमने मुझे दी थी। तुम्हारे कर्म में दूसरे की मदद करने की भावना के कारण में ‘, में तुम्हे पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद देने आई हूँ।
“लेकिन तुम्हारा बेटा 21 साल से ज्यादा जीवन नहीं जी पाएगा। फिर भी उसकी मौत होते ही तुम्हे उसको एक संदूक में डाल देना। और साथ में चार दही के घड़े रखना और बीच जंगल में छोड़ देना। ” इतना कहकर नीली आँखों वाली परी राजा के आँखों से ओझल हो गई।
रानी ने सारी बात अपनी पत्नी मैत्री को जाकर बता दी ,और राजा ने वह आम भी दिया खाने के लिए रानी को। रानी के आम खाने के नो महीने के बाद एक बेटे को जन्म दिया। बेटे होने की खुशी में राजा ने बहुत बड़ा जशन रखा और उसमे अपने बेटे का नाम देव रखा।
देखते ही देखते राजकुमार देव 21 साल के हो गए। राजकुमार के विवाह के लिए कई सारे प्रस्ताव आने लगे। राजा ने अपने बेटे की शादी एक बहुत ही बुद्धिमान लड़की वत्सला से शादी करवा दी। शादी के कुछ दिन बाद ही नीली आँखों वाली परी की बात सच हो गई , और राजकुमार की मौत हो गई।
राजकुमार की मौत के बाद राजा को अचानक से नीली परी की बात याद आ गई। और राजा ने अपने सेवको से कहकर एक बड़ा सा संदूक ,और दही के चार घड़े मंगवाये ।
राजा ने बड़े ही दुःख के साथ अपने बेटे को उस संदूक में डाला साथ में वो चार घड़े दही वाले रखे ,उसके बाद राजा ने अपने उस संदूक को जंगल के बीचो -बीच रखवा दिया। राजकुमार की मौत के बाद राजा का मन किसी काम में नहीं लगता था। और राजकुमार की पत्नी वत्सला भी अपने मायके चले गई।
समय बीता और देव की मृत्यु को एक साल हो गए। राजकुमार देव की पत्नी वत्सला के घर एक दिन एक बूढ़ा आदमी खाना मांगने पंहुचा ,देव की पत्नी ने उसे बड़े प्यार से खाना खिलाया।
खाना खाने के बाद उस बूढ़े आदमी ने जब अपना हाथ धोने के लिए दूसरा हाथ की मुट्ठी खोली तो , उसम मुट्ठी में उसने अपने पति देव की चैन देखी।
वत्सला ने उस आदमी से पूछा आपको ये चैन कहा से मिली ? यह चैन मेरे पति की है ,उन्हें संदूक में डाल के जंगल के बीचो -बीच रखा था। बूढ़े आदमी ने डरते हुए कहा हां ” ये चैन मैने वही से निकली है। “वत्सला ने कहा ‘ आप डरिये मत , में बस उस संदूक तक जाना चाहती हू। जहां मेरे पति का संदूक रखा है।
आदमी ने कहा ” वह बहुत भयानक जंगल है, में आपको वह तक नहीं ले जा सकता। हां लेकिन आप कहोगे तो में आपको उस संदूक को दूर से दिखा के छोड़ सकता हूँ।
वत्सला ने तुरंत हां कहा ,फिर बूढ़ा आदमी वत्सला को जंगल में छोड़ कर चला गया। वत्सला अपने पति के संदूक को ढूढ़ने निकल पड़ी घने जंगलो में ,वह जाकर उसने अजीब सी चीजे देखी ,उस संदूक पर बहुत सारी परियां है। वत्सला पेड़ के पीछे से चुप कर ये सब देख रही थी।
वत्सला ने देखा सारी परियो के बीच एक नील आँखों वाली आई ,और उसने एक लकड़ी देव के मृत शरीर के सिर के पास और एक पैर के पास रखी। तभी राजकुमार संदूक से बाहर निकल आया। सभी परियो ने राजकुमार को मिठाई खिलाई ,और फिर से राकुमार को संदूक में डालकर लकड़ियों की जगह बदल दी।
रोज रात नीली आँखों वाली परी देव को संदूक से निकालती ,और फिर उसी संदूक में डाल देती। वत्सला डरते हुए उसी जंगल में तीन से चार दिन तक जंगल के फल खा कर रुकी रही और सब देखती रही।
एक दिन वात्सल्य ने संदूक खोला ,देव ने अपनी पत्नी वत्सला को देखा वो हैरान रह गया। देव जैसे ही कुछ बोलता उसे पहले वत्सला बोल पड़ी “मै आपको ऐसी जगह और ऐसी स्तिथि में नहीं रहने दूंगी। आपको मेरे साथ चलना होगा।
देव ने वत्सला को समझते हुए कहा। ” नीली परी की वजह से ही मै दुनिया मे आया हूँ।”मै उसकी आज्ञा के बिना कही नहीं जा सकता । तुम मेरे संदूक मै रखा एक घड़ा उठा के अपने राज्य ले जाओ।
वहा छुपकर रखना ,नौ महीने बाद तुम्हे पुत्र होगा और फिर तभी ” मे तुमसे मिलने आऊंगा। अब तुम लकड़ी की स्थिति बदल कर मुझे पहले की तरह जाने दो।
वात्सलय ने अपने पति के कहे अनुसार ही किया। अपने पति को संदूक मे रखने के बाद वत्सला अपने घर चली गई। और चिढ़ी लिखकर रानी से महल में रहने की आज्ञा मांगी ,रानी ने दया कर के राजमहल के पास एक कमरा दे दिया। जब रानी को पता चला की वत्सला गर्भवती है ,तो रानी वत्सला का ख्याल भी रखने लगी।
जब वत्सला ने बच्चे को जन्म दिया तो , देव भी उससे मिलने के लिए आये। उस समय रानी पास से गुजर रही थी ,तभी रानी ने अपने बेटे को पहचान लिया । और देव के पास जाकर कहने लगी ये तुम्हारा बच्चा है ? तुम कहा थे अभी तक , में अब तुम्हे कही जाने नहीं दूंगी। नीली आँख
“देव ने कहा माँ में आपके साथ नहीं रह सकता। इसका एक ही उपाय है की आपको अपने पोते के लिए एक बड़ा सा जश्न करना होगा । उस उत्सव में आपको सारी परियो को बुलाना हो ,और नीली वाली पारी का बाजु बंद लेकर किसी तरह आपको जला देना। और नीली आँखों वाली पारी से मेरे जीवन का वरदान मांग लेना।
इतना कहकर देव वह से चला गया ,रानी ने बड़े ही दुखी मन से राजकुमार को विदा दिया। कुछ दिनों बाद रानी मैत्री ने अपने बेटे के कहे अनुसार एक बहुत बड़ा उत्सव रखा ,उस उत्सव में रानी ने सभी परियो को भी बुलाया।
सभी जश्न में दुबे हुए थे। तभी रानी का पता अचानक से रोने लगा ,और पारी ने उस बच्चे को अपने गोद में उठा लिया।
तभी रानी ने मैत्री ने पारी से कहा की , देखिये न इसे आपका बाजु बंद पसंद आ गया है “क्या आप इसे खेलने के लिए अपना बाजूबंद दे देंगी?”
पारी ने तुरंत अपना बाजूबंद बच्चे को दे दिया। रानी को इसी मोके का इंताजर था।, रानी सभी से चुप कर पारी का बाजूबंद जला दिया। पारी ने अपने बाजु बंद को जलते देखकर रानी से “कहा की ये आपने क्या किया ?
अब हम आपके बेटे देव को आपने पास नहीं रख पाएंगे। यह सुनते हुए रानी ने परी से प्राथना की ” कहा की आपके कृपा से ही मेरे बेटे का जन्म हुआ था। अब आप ही मेरे बेटे को वापस करोगी। में आपसे भीख मांगती हूँ।
परी को माँ की ममता देख कर दया आ गई। और परी ने आशीर्वाद दे दिया ‘ जिससे राजकुमार उस संदूक से निकल कर बाहर आ गए। और खुशी -खुशी आपने परिवार के साथ रहने लगे नीली आँखों वाली परी (Hindi Motivation story)
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