फूलो की राजकुमारी थंबलीना की कहानी (Hindi Motivation story) – : कुछ समय पहले एक शहर में एक औरत अकेली रहती थी। उसका अपना कोई भी नहीं था ,इस बात से वह बहुत दुखी थी। एक दिन वह अपनी परी दोस्त से मिलने के लिए गई। उसने अपनी परी दोस्त से कहा की मुझे एक बेटी चाहिए।
परी ने उसकी बात सुनकर एक बीज दिया। और बोली तुम उस बीज को अपने घर के गमले में लगा देना। परी से बीज लेने के बाद वह महिला ने वैसा ही किया ,जैसा की परी ने उसे कहा था। अगले दिन जब वह गमले के पास गई तो ,उसने देखा की उसमे एक सुन्दर सा फूल खिला था।
वह एक जादुई फूल था ,जिसका नाम ट्यूलिप था। उसकी पंखुड़ी आधी ही खुली थी। उस औरत ने फूल को जैसे ही चूमा , तो उसकी पंखुड़ी पूरी खुल गई। फूल के खिलते ही उसमे से एक लड़की बाहर निकली।
वह लड़की फूल की तरह ही कोमल थी। उस लड़की का आकर एक अगुठे जितना था। इसलिए उस औरत ने उसका नाम थंबलीना रहा।
महिला ने थंबलीना से कहा “बेटी में तुम्हारी माँ हूँ ” और अब में तुम्हारा लालन पोषण करुँगी। और तुम्हे बहुत प्यार से रखूंगी। यह सुनकर थंबलीना बहुत खुश हुई , और खुशी -खुशी घर में रहने लगी। एक दिन थंबलीना खेल रही थी। तभी एक मेडक की नजर थंबलीना पर पड़ी ,उसने सोचा की क्यों न में अपने बेटे की शादी इससे करवा दू।
यह सोचकर वह थंबलीना को उठा के अपने बेटे केपास ले गया। मेडक के बेटे ने थंबलीना को देखकर शादी के लिया तैयार हो गया। मेडक ने थंबलीना को तालाब के पास एक पत्ते पर रख कर शादी की तैयारी करने लगा।
तालाब के बीच बैठी थंबलीना चाह कर भी वहा से भाग नहीं पा रही थी। आखिर में वह रोने लगी ,उसके रोने की आवाज सुनकर वहा एक तितली आई। थंबलीना को रोते देख तितली ने थंबलीना को उठा कर एक फूल के नगर में ले गई। उस नगर में तितली ने थंबलीना को अपने साथ रखा ,और उसके खाने -पीने का ख्याल में लग गई।
तभी एक झींगुर की नजर थंबलीना पर पड़ी और वह उसकी खूबसूरती को देख उसका कायल हो गया। यह देख उसने अपने दिल की बात बताने के लिए थंबलीना के पास पंहुचा ,यह सुन थंबलीना के कहा हम दोनों एक नहीं हो सकते। हम दोनों अलग अलग जीव है। फूलो की राजकुमारी थंबलीना की कहानी (Hindi Motivation story)
तभी झींगुर के दोस्त ने कहा ,”दोस्त यह थोड़ी अजीब है। ये हमारे जैसी नहीं है।”
यह बात सुन झींगुर समझ गया और , थंबलीना छोड़ दिया। इसके बाद थंबलीना अपने घर का रस्ता ढूढ़ने लगी। तभी वह भटक कर एक बिल में घुसी । उस बिल की रानी चुहिया थी। जो बहुत बुढ़िया थी।
चुहिया ने थंबलीना को सहारा दिया ,और बदले में उससे अपने घर का सारा काम करवाने लगी। एक दिन उसके घर में छछूंदर आया जिसका नाम मिस्टर मोला था। वह भले ही देख नहीं सकता था पर वह थांबलीना की आवाज पर फिदा था।
मिस्टर मोला ने चुहिया से कहा,की वह थांबलीना से शादी करना चाहता है। और दोनों की शादी चुहिया ने तय कर दिया। तभी घर से बाहर छोड़ने जाते वक्त ,थंबलीना को एक चिड़िया मिली ,जो घायल और बिहोश थी।
थंबलीना ने उस चिड़िया की मदद करने लगी। बुढ़िया चुहिया और मिस्टर मोल ने उसे रोकने की कोशिश की , लेकिन थंबलीना ने उनकी बात नहीं मानी। फूलो की राजकुमारी थंबलीना की कहानी (Hindi Motivation story)
उसने दिन रात एक करके चिड़िया की सेवा की ,कुछ दिन बाद चिड़िया पूरी तरह ठीक हो गई। चिड़िया के ठीक होने से थंबलीना खुश हुई ,लेकिन शादी के दिन नजदीक आ रहे थे , इसलिए वह बेचैन थी ।
थंबलीना ने चिड़िया से सारी बातें बताई। तभी चिड़िया ने कहा जल्दी से तुम मेरे पीठ पर बैठ जाओ। में तुम्हे यहाँ से दूर ले जाउंगी। थंबलीना तुरंत उसके पीठ पर बैठ गई।
चिड़िया ने थंबलीना को बहुत दूर एक फूलो के देश में लेकर पहुंची। वहा पर फूलो के राजकुमार की नजर थंबलीना पर पड़ी। देखते ही राजकुमार ने थंबलीना से पूछा की क्या तुम मुझसे शादी करके यह की रानी बनोगी?
थंबलीना को कुछ समझ नहीं आ रहा था , तभी वहा चिड़िया आई उसने बताया की ये फूलो के राजा है। और बहुत ही अच्छे दिल के है। यह सुनकर थंबलीना ने शादी के लिए हां कर दी। थंबलीना को शादी के बाद फूलो का पंख भी मिल गया और थंबलीना फूलो की रानी कहलाने लगी।
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