सबसे बड़ा मुर्ख कौन है ?(Hindi Motivation Story) – : कुसुमपुर नाम के एक नगर ने ब्राह्मण परिवार रहता था। ब्राह्मण के परिवार में 4 बेटे और उसकी पत्नी थी ,ब्राह्मण अपने परिवार के साथ सुखी से जीवन व्यतीत कर रहा था।
एक दिन ब्राह्मण अचानक बीमार हो गया ,उसकी हालत दिन प्रतिदिन ख़राब होती चली गई।
” और अचानक एक दिन उसकी मौत हो गई।
ब्राह्मण की मौत के दुःख में उसकी पत्नी भी सती हो गई।
“ब्राह्मण और उसकी पत्नी की मृत्यु के बाद , उनके रिश्तेदारों ने चारो पुत्रो को अकेला देख , उनका सारा धन छीन लिया। पूरी तरह से कंगाल होने पर चारो लड़के अपने नाना के घर चले गए।
“कुछ दिन तक तो सब ठीक -ठाक चला ,’लेकिन बाद में ब्राह्मण के चारो पुत्रो के साथ बुरा व्यवहार किया गया।
ऐसे परिस्तिथि को देख उन चारो ने निर्णय किया की , उन्हें कोई ऐसी विद्या सीखनी चाहिए “
ताकि लोग उनके माता पिता की तरह उनका भी सम्मान करे।
” यही सोचकर चारो भाई , चारो दिशाओ में चले गए।
चारो भाईओ ने घोर तपस्या की ‘और कुछ विद्या हासिल की।
जब चारो भाई काफी समय बाद आपस में मिले तो , चारो भाईओ ने अपने – अपने द्वारा मिली विद्या को बतया।
“एक ने कहा में मरे हुए कंकाल पर मॉस चढ़ा सकता हूँ।
“दूसरे ने कहा में मास पर खाल और बाल बना सकता हूँ।
“तीसरे ने कहा में मरे हुए सभी जीवो का निर्माण कर सकता हूँ ।
“चौथे ने कहा में मरे हुआ में जान फुख सकता हुआ। सबसे बड़ा मुर्ख कौन है ?(Hindi Motivation Story)
सभी ने अपनी -अपनी विद्या का गुणगान किया , और एक दूसरे की विद्या की परीक्षा लेने के लिए जंगल पहुंच गए।
‘जंगल में उन्हें एक मरे हुए शेर का कंकाल मिला ,’ उन्होंने बिना जाने की यह किसका कंकाल है। उसे उठा लिया । “
फिर पहले ने अपनी विद्या से उस पर मास चढ़ा दिया , दूसरे ने उस पर बाल और खाल पैदा कर दिया , तीसरे ने उस जीव के सभी अंगो को पैदा कर दिया ,चौथे ने उस जीव में जान फुख दी।
शेर जीवित हो कर चारो भाईओ को मार के खा गया।
इतनी कहानी सुनते ही बेताल चुप हो गया।
समाप्त
तभी बेताल बोलता है , बताओ राजन इन चारो पढ़े लिखे मूर्खो में सबसे बड़ा मुर्ख कौन है ? विक्रम ने जबाब देते हुए कहा , सबसे बड़ा मुर्ख चौथे नंबर का भाई है। जिसने शेर में जान फुख दी ,
क्युकी और भाईओ ने बिना जाने ही उस जीव का निर्माण किया की वह कौन सा जीव है , लेकिन चौथे भाई को तो पता चल चूका था की ये शेर का शरीर है , उसके बाउजूद उसने शेर में जान फुख दी। यही उसकी मूर्खता का प्रणाम है।
बेताल ने कहा सही कहा राजन तुमने इतना कहते ही बेताल फिर से घने जंगल में चला गया।
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